हेल्थ

उत्तराखंड में 34 बूथों पर 3400 हेल्थ वर्कर को टीकाकरण शनिवार से

दून व हल्द्वानी के स्वास्थ्य कर्मियों से बात भी करेंगे प्रधानमंत्री मोदी
देहरादून । आखिर वह घड़ी आ ही गई है जिसका इंतजार पिछले दस माह से किया जा रहा था। नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से बचाव के लिए देश—प्रदेश में शनिवार से टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सुबह साढ़े 10 बजे इस महाअभियान की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड में भी टीकाकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहले दिन 34 स्थानों (बूथों) पर हेल्थ वर्कर्स को टीके लगाए जाएंगे। इनमें 32 सरकारी चिकित्सा संस्थान व दो प्राइवेट चिकित्सा संस्थान शामिल हैं। हर बूथ पर एक सौ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक व टीकाकरण अभियान की राज्य नोडल अधिकारी सोनिका ने बताया कि सभी 13 जनपदों में कोविड-19 का टीका लगाया जाएगा। देहरादून जनपद में पांच, हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर में चार-चार, नैनीताल में तीन तथा अन्य जनपदों में दो—दो बूथों पर हेल्थ वर्कर्स को टीका लगाया जाएगा। बताया कि टीकाकरण के लिए जो 32 सरकारी चिकित्सा इकाईयां चिन्हित की गई हैं उनमें एम्स ऋषिकेश व ऋषिकुल आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी भी शामिल है। जबकि प्राइवेट चिकित्सा इकाईयों में हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट व एसजीआरआर मेडिकल कालेज शामिल किया गया है। बताया कि टीकाकरण के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग से दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय व हल्द्वानी मेडिकल कालेज में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से भी बात करेंगे। प्रत्येक बूथ पर 100—100 हेल्थ वर्कर को टीका लगाया जाएगा। यानी पहले दिन राज्य में 3400 लोगों को कोरोना का टीका लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य महानिदेशक डा. अमिता उप्रेती ने बताया कि सभी जिलों में वैक्सीन सुरक्षित पहुंच गई है। शनिवार सुबह को सभी स्थानों पर वैक्सीन टीकाकरण के लिए निर्धारित कोल्ड चेन प्रणाली के अंतर्गत उपलब्ध रहेगी। बताया कि सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही टीकाकरण का कार्य करें। सभी बूथों पर कोविड की गाइडलाइन का पालन भी सुनिश्चित किया जाए। बताया कि सभी जनपदों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि आपूर्ति की गई वैक्सीन की पहली डोज देने के दौरान इस बात को भी सुनिश्चित किया जाए कि पचास प्रतिशत वैक्सीन दूसरी डोज के लिए भी सुरक्षित रखनी है।
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