साहित्य

डा. पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल के योगदान व कार्यो पर चर्चा

देहरादून। बड़थ्वाल कुटुंब की ओर से प्रेस क्लब में डॉ पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल की जयंती के मौके पर एक गोष्टी आयोजित की गयी। जिसमे हिंदी साहित्य में डॉ पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल के योगदान व कार्यो पर चर्चा की गई। साथ ही वर्ष 2022 की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया।
गोष्ठी में लेखिका बीना बेंजवाल ने कहा कि डॉ पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल को नमन करते हुए कहा कि वह एक आलोचक भी थे। लेकिन अफसोस ये है कि हिंदी साहित्य को ऊंचाईयों तक पहुंचाने वाले के बावजूद भी उन्हें वो स्थान आज तक नही मिला है। डॉ देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि जब 10 साल पहले मैंने डॉ पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल जी पर शोध करना शुरू किया तो मुझे देहरादून के अंदर केवल दो बड़थ्वाल परिवार मिले लेकिन आज ये संख्या बढ़कर 20 हो गयी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कवि मैथलीशरण गुप्त को राष्ट्रीय कवि बनाने में 5 लोगों ने विशेष भूमिका निभाई, जिसमे डॉ पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल भी एक थे।  मुख्य वक्ता राम विनय सिंह ने कहा कि हिमालय के एक गांव के एक कमरे में जन्म लेने वाले डॉ पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल जन्मजात साहित्यकार ने काशी में जाकर अपने अतुलनीय ज्ञान से जन मानस को लाभान्वित किया है। उनके साहित्य की बात करे तो आपको पता चलेगा कि संत साहित्य को एक माला में पिरोने का काम डॉ पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल ने किया है। उन्होंने बताया कि डॉ पिताम्बर दत्त बड़थ्वाल कहते थे कि संत आध्यात्मिक चेतना का वाहक होता है।

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