साहित्य

‘वन्दना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला दो, हो जहां पर शीश अर्पित एक सिर मेरा मिला दो’

देहरादून। हिन्दी साहित्य समिति की ओर से आयोजित हिन्दी भवन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के नामचीन साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। हिन्दी साहित्य समिति के सभी सदस्यों को महामंत्री हेमवती नंदन कुकरेती ने कहा कि अब हिन्दी साहित्य समिति के सभी कार्य क्रम हिन्दी भवन में ही आयोजित किए जायेंगे और नगर की सभी साहित्यिक,सामाजिक संस्थाएं भी हिन्दी भवन में नियमानुसार काय॔क्रम आयोजित कर सकती हैं।
डाॅ. नीता कुकरेती ने माॅ सरस्वती की वन्दना के साथ कार्य क्रम की शुरुआत की। उन्होंने ‘वन्दना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला दो। हो जहाँ पर शीश अर्पित एक सिर मेरा मिला दो।’
पवन शर्मा ने ‘जीवन गमगीन बना,धन की खातिर जब इन्सान मशीन बना। जीवन वरदान बने अगर, हर आदमी पहले इन्सान बने’। वरिष्ठ साहित्यकार असीम शुक्ल ने ‘नदी डूब मरी आज,जाने किस ठांव। देह नहीं वल्कल है, रिश्तों से हीन है। पथराई यादों को कूड़े से बीन। रेत लिए हाथों में, कांप रहा गाँव है’। इसी क्रम में हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ रामविनय सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। उन्होंने ‘नफरत की दीवारों पर तुम अपने मीठे बोल लिखो। उबड़ खाबड़ सी जमीन पर समतल सा भूगोल लिखो’।
काव्य गोष्ठी में जसबीर सिंह हलधर, संगीता शाह, नीलम प्रभा, माहेश्वरी कनेरी, डॉ नीता कुकरेती, के डी शर्मा, विजय रतूडी, दर्द गढवाली, मोहन सिंह कण्डारी आदि अनेक कवियों ने ओजस्वी वाणी में कविता पाठ किया।  कार्यक्रम का संचालन महामंत्री हेमवती नंदन कुकरेती ने किया।

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