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डीआईटी विवि का दीक्षांत समारोह: 1237 छात्रों को उपाधियां और 36 को प्रदान किए मेडल

देहरादून। डीआईटी विश्वविद्यालय में छठे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत गुरमीत सिंह (से नि) ने प्रतिभाग किया। राज्यपाल ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1237 छात्रों को उपाधियां प्रदान करने के साथ 36 विद्यार्थियों को मेडल प्रदान किये। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय के दो एल्युमनी(Alumni) को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट और दीक्षांत समारोह की स्मारिका का भी अनावरण किया।
दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने सभी मेडल एवं डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों को भी बधाई दी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि उपाधि प्राप्त करके रोजगार तलाशने की पंक्ति में खड़े न हो अपितु स्वयं रोजगार देने वाले साबित हों। उन्होंने कहा कि आने वाले अमृत काल के इन 25 वर्षों में विकसित भारत का नेतृत्व आपकी पीढ़ी को करना है। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपने हाथों से विकसित भारत के सपनों को साकार करते हुए आगे बढ़े। राज्यपाल ने कहा कि हमें हर क्षेत्र में शक्ति और समृद्धि अर्जित करते हुए विश्व गुरू के शिखर पर पंहुचना है जिसमें आप सभी युवाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी, रिसर्च, आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी आदि तकनीकों के बल पर आगे बढ़ते हुए परिवर्तन की एक क्रान्ति लाएं। भारत के लिए ज्ञान-विज्ञान प्रणाली से नए रिकॉर्ड स्थापित करें। उन्होंने कहा कि एक नए विजन के साथ देश सेवा का संकल्प लेकर आगे बढें। राज्यपाल ने कहा कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपनों को पूरा करने के लिए हमें प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए 5 मूलमंत्र को आत्मसात करना होगा।
राज्यपाल ने डीआईटी विश्वविद्यालय की 24 वर्षों की सफल यात्रा के लिए बधाई और आने वाले भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ ही यहां की अवस्थापना सुविधाएं भी बेहतरीन हैं। दीक्षांत समारोह में कुलपति डॉ. जी. रघुराम ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और नवाचारों की संक्षिप्त जानकारी दी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चेयरमैन अनुज अग्रवाल, चांसलर एन. रविशंकर, एडवाइजर डॉ. आर.सी. गोयल, प्रो. वाइस चांसलर प्रिय दर्शन पात्रा, रजिस्ट्रार डॉ. वंदना सुहाग सहित विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्यगण एवं उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।

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