डॉली डबराल की पुस्तक ‘पत्थरों के बीच’ का विमोचन
देहरादून। लेखिका डॉली ठकराल की दसवीं पुस्तक ‘पत्थरों के बीच’ का विमोचन ऑफिसर्स क्लब यमुना कालोनी के सभागार में मुख्य अतिथि संजीव चोपड़ा, आईपीएस अनिल रतूडी, राधा रतूडी, वरिष्ठ साहित्यकार डा. विजयपाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आईपीएस अनिल रतूड़ी ने कहा कि यह लघु उपन्यास का कथानक आज के प्रगतिशील भारत में उनके अतीत की छाया प्रस्तुत करता है। पितु सत्तात्मक समाज में महिला की दशा, बाल विवाह, बाल विधवा, गरीब, कुपोषण, भूमि हस्तांतरण, बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम, श्रमिक शोषण, व्यवस्था का भ्रष्टाचार ऐसे जटिल समाज के मध्य विधवा के अंतर्जातीय प्रेम के दुस्साहस की कहानी व उसकी आसदी को लेखिका ने मार्मिक किंतु सराहनीय तरीके से प्रस्तुत कर समाज को दर्पण दिखाने का कार्य किया है। वरिष्ठ साहित्यकार डा. विजयपाल शर्मा ने कहा कि यथार्थ की जमीन पर आदर्श की स्थापना डॉली डबराल की विशेषता है। उनकी रचनाओं में भाषा की सहजता और सरलता देखते ही बनती है। डा. राम विनय शर्मा ने कहा कि वह अपनी बेबाक और धारदार लेखन के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।
मुख्य अतिथि संजीव चोपड़ा ने लेखिका डॉली डबराल की नवीनतम उपन्यास पत्थरों के बीच पर चर्चा करते हुए कहा कि इस उपन्यास में लेखिका नारी पर अतीत में हुए समाजिक अत्याचारों की कहानी को बहुत ही अच्छे ढंग से चित्रित करने में पूर्णतः सफल रही है। कार्यक्रम को अध्यक्षता करते हुए राधा रतूड़ी ने डॉली डबराल की नवीनतम कृति पत्थरों के बीच (एक प्रेम कथा) को बहुत ही ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर आधारित रचना बताया जो हृदय की गहराइयों तक पहुँचती है। लेखिका डॉली डबराल ने कहा कि पुराने श्रेष्ठ कवि साहित्यकारों को याद करना उनके साहित्य को जीवंतता देना भी साहित्यिक कर्म होना चाहिए। इस दौरान शेर जंग स्मृति सम्मान वरिष्ठ कवयित्री डा. इंदु अग्रवाल और शायर अंबर खरबंदा को प्रदान किया गया। इस मौके पर पर डा. सविता मोहन, डा. पुनीत त्यागी, दलजीत कौर, शायरा अंशिका सिंह रूही, लल्लन भाई, मोनिका, रजनीश त्रिवेदी, अनिल अग्रवाल, सुशील उपाध्याय, दिनेश शर्मा आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डा. भारती मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन गीतकार सत्य प्रकाश सत्य ने किया।
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