Home धर्म-संस्कृति प्रसिद्ध साहित्यकार दिनेश चमोला “शैलेश” को विज्ञान परिषद ने किया सम्मानित

प्रसिद्ध साहित्यकार दिनेश चमोला “शैलेश” को विज्ञान परिषद ने किया सम्मानित

देहरादून। साहित्य अकादमी (बाल साहित्य)  पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार, प्रो. दिनेश चमोला “शैलेश” को  हिंदी में विज्ञान लेखन के क्षेत्र में इलाहाबाद की प्रसिद्ध संस्था विज्ञान परिषद द्वारा सम्मानित किया ।  प्रख्यात शिक्षाविद एवं परिषद के उप सभापति डॉ. कृष्ण बिहारी पांडेय तथा प्रो.एस.जी.मिश्र ने शॉल ओढ़ाकर प्रो.चमोला का अभिनंदन किया । प्रो.चमोला ने परिषद द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित प्रतिष्ठित ‘डॉ. रामकुमारी मिश्र व्याख्यानमाला’ के विशिष्ट अतिथि के रूप में इसमें प्रतिभागिता की तथा ‘अर्थ तत्त्व एवं शब्द शक्तियां’ विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया जिसकी उपथित विद्वानों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की । उन्होंने अक्षर, शब्द-संरचना, अर्थ-परिवर्तन की दिशाओं के भाषवैज्ञानिक चिंतन के साथ-साथ साहित्य के नामचीन साहित्यकारों के व्यावहारिक संस्मरणों के माध्यम से विषय को रोचकता व प्रामाणिकता प्रदान की । पिछले चालीस (40) वर्षों से देश की अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं के लिए अनवरत लिखने वाले साहित्यकार प्रो.चमोला हिंदी जगत में अपने बहु-आयामी लेखन के लिए सुविख्यात हैं ।

बता दें कि 14 जनवरी, 1964 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम कौशलपुर में स्वर्गीय पं. चिंतामणि चामोला ज्योतिषी एवं  माहेश्वरी देवी के घर मेँ जन्मे प्रो. चमोला  ने शिक्षा में प्राप्त कीर्तिमानों यथा एम॰ ए॰ अंग्रेजी, प्रभाकर; एम॰ ए॰ हिंदी (स्वर्ण पदक प्राप्त); पीएच-डी॰, डी॰लिट्ट॰ के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी राष्ट्रव्यापी पहचान बनाई है। अभी तक प्रो. चमोला  ने उपन्यास, कहानी, दोहा, कविता, एकांकी,  बाल साहित्य, समीक्षा, शब्दकोश, अनुवाद, व्यंग्य, लघुकथा, साक्षात्कार, स्तंभ लेखन के साथ-साथ एवं  साहित्य की विविध विधाओं में छिहत्तर (76) से अधिक पुस्तकों में लेखन किया है । आपके व्यापक मौलिक साहित्य पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में एम.फिल्./पीएच॰डी स्तरीय कई शोध प्रबंध संपन्न हो चुके हैं /चल रहे हैं ।
आपकी चर्चित पुस्तकों में ‘यादों के खंडहर, ‘टुकडा-टुकड़ा संघर्ष, ‘प्रतिनिधि बाल कहानियां, ‘श्रेष्ठ बाल कहानियां, ‘दादी की कहानियां¸ नानी की कहानियां, माटी का कर्ज, ‘स्मृतियों का पहाड़, ‘क्षितिज के उस पार, ‘कि भोर हो गई, ‘कान्हा की बांसुरी, ’मिस्टर एम॰ डैनी एवं अन्य कहानियाँ,‘एक था रॉबिन, ‘पर्यावरण बचाओ, ‘नन्हे प्रकाशदीप’, ‘एक सौ एक बालगीत, ’मेरी इक्यावन बाल कहानियाँ, ‘बौगलु माटु त….,‘विदाई,  ‘अनुवाद और अनुप्रयोग, ‘प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी, ‘झूठ से लूट’, ‘गायें गीत ज्ञान विज्ञान के’ ‘मेरी 51 विज्ञान कविताएँ’ तथा ‘व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश’ आदि प्रमुख हैं। श्री चमोला उत्कृष्ट साहित्य सृजन एवं उल्लेखनीय हिदी सेवा हेतु देश-विदेश की पचास से अधिक संस्थाओं द्वारा सम्मान पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।आपके संपादन में प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी पत्रिका ‘विकल्प’ ने  राष्ट्रीय स्तर पर अपने महत्वपूर्ण विशेषांकों के माध्यम से अपनी अलग पहचान अर्जित की है। डॉ॰ चमोला ने भारत सरकार में संयुक्त निदेशक (हिन्दी) सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया है तथा पूर्व में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून में राजभाषा के प्रमुख रहे हैं तथा वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आधुनिक  ज्ञान  विज्ञान संकाय के डीन तथा भाषा एवं आधुनिक  ज्ञान  विज्ञान के अध्यक्ष हैं । गढ़ विहार, फेज-1, देहरादून  में रहते हैं ।

डॉ॰ चमोला ने देश के शताधिक विद्वानों के साक्षात्कार लिए हैं। अपने अनेक साक्षात्कार, रचनाओं का प्रसारण देश के 8 दूरदर्शन केंद्रों तथा 12 आकाशवाणी केंद्रों से प्रसारित हुए हैं । देश-विदेश की सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं के स्थापित लेखक  हैं ।  ।
आपके उपन्यास ‘टुकड़ा-टुकड़ा संघर्ष’ का कन्नड़ भाषा तथा अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद एवं प्रकाशन हुआ है।  देश के अनेक विश्वविद्यलयों, आयोगों की परीक्षाओं;  शोध समितियों, पाठ्यक्रम समितियों के साथ-साथ पी-एच.डी, एम.फिल, एम.ए. की परीक्षाओं के प्रश्ननिर्माता, मूल्यांकनकर्ता, परीक्षक व सम्मानित विशेषज्ञ हैं। साहित्य अकादमी,दिल्ली की जनरल काँसिल तथा हिंदी परामर्श मंडल के सम्मानित सदस्य भी हैं । इसके साथ ही आप नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया , भारत सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं । आपके द्वारा अनुवाद, प्रयोजनमूलक हिंदी व व्यावहारिक राजभाषा शब्दकोश सदृश पुस्तकें देश के अनेक विश्वविद्यालयों में संदर्भ पुस्तकों के रूप में लगी हुई हैं ।
इस अवसर पर आपने चर्चित हिंदी पत्रिका ‘अभिनव इमरोज़’ के अपने अतिथि संपादन में प्रकाशित ‘प्रो. शिव गोपाल मिश्र विशेषांक’, सितंबर, 2021 तथा लोकगीत विषयक प्रो मिश्र की पुस्तक के लोकार्पण भी किया।
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