धर्म-संस्कृति

350 साला पर पटेलनगर गुरुद्वारे में कीर्तन दरबार

देहरादून। सिख पंथ के नौवें गुरु धन धन श्री तेगबहादुर जी के बलिदान के तीन सौ पचास साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में शनिवार रात्रि व रविवार प्रातः को कीर्तन दरबार सजाया गया। बाबा बकाला से पधारे महान कीर्तनिये सरदार गुरप्रीत सिंह ने गुरु तेगबहादुर जी के महान बलिदान पर शब्द कीर्तन गाकर संगतों को निहाल किया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने गुरु तेगबहादुर के बलिदान को दुनिया के तमाम बलिदानों में सर्वोच्च व सर्वश्रेष्ठ बलिदान बताते हुए कहा कि पूरी दुनिया में ऐसा बलिदान जो कौम और देश की रक्षा के लिए स्वेच्छा से दिया गया हो कहीं उदाहरण नहीं मिलता। श्री धस्माना ने कहा कि औरंगज़ेब के अत्याचारों के खिलाफ गुरु तेगबहादुर ने जिस साहस के साथ अपने धर्म पर अडिग रहते हुए धर्मपरिवर्तन व तमाम प्रलोभनों के प्रस्ताव को ठुकराया और धर्मरक्षा के लिए अपना सर कटवाना मंजूर किया ऐसा कर उन्होंने अपने सिख पंथ में गुरु अर्जन देव जी के पद चिन्हों पर चलते हुए आने वाली पीढ़ियों को त्याग और बलिदान की प्रेरणा दी। जिस पर चलते हुए दसवें गुरु श्री गुरुगोबिंद सिंह जी ने अपने चार चार पुत्र व अपना सर्वस्व देश के लिए और कौम की रक्षा के लिए नौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ पूरी दुनिया में इकलौता पंथ है जहां अपने शहीदों के शहीदी दिवस को कोई मातम नहीं बल्कि पर्व के रूप में मनाया जाता है।
श्री धस्माना ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए किसी की जान लेने से ज्यादा महत्व धर्म की रक्षा के लिए हंसते हंसते अपने प्राणों का बलिदान देना इससे ज्यादा महान कोई कार्य नहीं हो सकता।
इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पटेलनगर के प्रधान सरदार हर मोहिंदर सिंह व सरदार जसविंदर सिंह ने श्री धस्माना को गुरु तेगबहादुर के बलिदान के ३५० साल का स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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